मोदी-मेलोनी की 'Melody' डिप्लोमेसी: $2 बिलियन के बिस्कुट साम्राज्य 'Parle' से सोशल मीडिया वायरल ट्रेंड तक!
May 23, 2026

मोदी-मेलोनी की 'Melody' डिप्लोमेसी: $2 बिलियन के बिस्कुट साम्राज्य 'Parle' से सोशल मीडिया वायरल ट्रेंड तक!

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने सबका ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को भारत की मशहूर 'Melody' टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया। मेलोनी ने इसका वीडियो शेयर करते हुए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया और देखते ही देखते 'Melody' और 'Meloni' का यह कॉम्बिनेशन इंटरनेट पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गया।

एक ब्रांड मार्केटर और कंटेंट क्रिएटर के नजरिए से देखें, तो यह सिर्फ एक "गिफ्ट" नहीं है, बल्कि यह Real-time Marketing और Cultural Branding का एक मास्टरक्लास है!

आइए इस वायरल मोमेंट के पीछे छिपे भारत के सबसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स में से एक — Parle — के सफर और इसकी बिजनेस स्ट्रेटेजी पर नजर डालते हैं:

🚀 आजादी से भी पुराना है 'Parle' का इतिहास

आज भले ही हम पारले को उसके 'Parle-G' बिस्कुट के लिए जानते हैं, लेकिन इस साम्राज्य की शुरुआत बिस्कुट से नहीं बल्कि टॉफी से हुई थी:

  • 1929 में शुरुआत: गुजरात के मोहनलाल दयाल चौहान ने सिर्फ 12 परिवारिक सदस्यों के साथ मुंबई के विले पारले में एक पुरानी फैक्ट्री में कन्फेक्शनरी यूनिट की शुरुआत की थी। उनका पहला प्रोडक्ट 'ऑरेंज कैंडी' था।
  • जर्मनी से ट्रेनिंग: बिजनेस शुरू करने से पहले मोहनलाल जी ने इसकी बारीकियां सीखने के लिए जर्मनी जाकर स्पेशल ट्रेनिंग ली थी।
  • 1938 में बिस्कुट मार्केट में एंट्री: कैंडी की सफलता के 10 साल बाद, कंपनी ने 'पारले-ग्लूको' (Parle-Gluco) नाम से बिस्किट बनाना शुरू किया, जो आज दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्कुट ब्रांड बन चुका है।

'मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ'- द मैजिक ऑफ 1983

साल 1983 में जब बाजार में कैडबरी 'एक्लेयर्स' जैसे बड़े ब्रांड्स का दबदबा था, तब पारले ने Melody को लॉन्च किया।

बाहर कारमेल और अंदर चॉकलेट की डबल लेयर वाले इस प्रोडक्ट ने मार्केट को री-डिफाइन कर दिया। और इसका आइकॉनिक स्लोगन- "मेलोडी इतनी चॉकोलेटी क्यों है? मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!"- भारतीय विज्ञापन इतिहास के सबसे सफल और यादगार कैंपेन्स में गिना जाता है।

$2 बिलियन का साम्राज्य और बिजनेस के 3 स्तंभ

आज विजय चौहान और उनकी फैमिली के नेतृत्व में चलने वाली यह प्राइवेट कंपनी सालाना लगभग 2 अरब डॉलर (करीब ₹16,000+ करोड़) की कमाई करती है। पारले का पूरा बिजनेस तीन मुख्य हिस्सों में बंटा है:

  1. Parle Products (बिस्कुट और कन्फेक्शनरी)
  2. Parle Agro (बेवरेजेस जैसे फ्रूटी, अपी फिज)
  3. Parle Bisleri (पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर)

आज भारत के 30 लाख से ज्यादा रिटेल स्टोर्स तक पारले की पहुंच है, और एक आंकड़े के मुताबिक भारत में हर सेकंड 4,000 से ज्यादा Parle-G बिस्कुट खाए जाते हैं!

प्रोफेशनल्स के लिए टेकअवे (Key Takeaways):

  1. Product Consistency: समय बदला, पैकेजिंग बदली, लेकिन पारले ने अपने स्वाद और क्वालिटी से कभी समझौता नहीं किया।
  2. Emotional Connection: पारले सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के बचपन की भावना (Emotion) बन चुका है।
  3. The Power of Organic Branding: जब आपका ब्रांड देश की जड़ों से जुड़ा होता है, तो वह ग्लोबल स्टेज पर भी भारत का प्रतिनिधित्व (Represent) करता है - ठीक वैसे ही जैसे आज 'मेलोडी' ने किया।

क्या आपने आज मेलोडी खाई? इस 'Melody' डिप्लोमेसी और पारले के इस शानदार सफर पर आपका क्या सोचना है? कमेंट सेक्शन में अपने विचार साझा करें! 

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